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वीरेंद्र देव दीक्षित रखता था आश्रम की लड़कियों के पीरियड्स की डिटेल्स!

वीरेंद्र देव दीक्षित

वीरेंद्र देव दीक्षित रखता था आश्रम की लड़कियों के पीरियड्स की डिटेल्स! वीरेंद्र देव दीक्षित की आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी में जो लड़कियां रह रही हैं, उनके परेशान और लाचार पैरंट्स की ऐसी चिट्ठियों से वकील शलभ गुप्ता का टेबल भरा पड़ा है। संत बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के दिल्ली और राजस्थान के आश्रमों में छापेमारी के बाद दिल्ली पुलिस और वकील गुप्ता को परेशान पैरंट्स चिट्ठियों पर चिट्ठियां लिख रहे हैं, वे अपनी बेटियों को बचाने की मांग कर रहे हैं। आपको बता दें कि आध्यात्मिक शिक्षा के नाम पर वीरेंद्र देव दीक्षित नाबालिग लड़कियों को लाता था। शुरुआत में वह उन्हें अपने गृहराज्य से दूर करता था ताकि वे परिवार से कम से कम संपर्क में रहें। माता-पिता अपनी बच्चियों से शुरुआत में कभी-कभार मिल पाते, वह भी थोड़ी देर के लिए और बहुत सारी लड़कियों के बीच। धीरे-धीरे संपर्क खत्म-सा हो जाता और अचानक लड़की से फोन पर संपर्क भी मुश्किल।

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ज्यादा उम्र की महिलाएं और पुरुष सेवादार का काम करते थे और बाहरी घेरे का काम करते थे। उन्हें भीतर जाने की इजाजत नहीं होती थी, जहां ‘माताएं’ और ‘बहनें’ बंद दरवाजों के भीतर रहती थीं। आश्रम से निकली एक महिला ने बताया कि लड़कियों को 2.30 बजे सुबह उठा दिया जाता था और टीवी के जरिए उन्हें वीरेंद्र देव दीक्षित के उपदेश सुनाए जाते थे। उनसे वीरेंद्र की तस्वीर को देखते हुए घंटों ध्यान लगाने के लिए कहा जाता था। इसके बाद वे सुबह 4 बजे नहाती थीं और पूरा दिन मुरली(उपदेश) सुनती थीं। एएसआई गर्ग और वहां से निकली एक महिला ने बताया कि अगर वीरेंद्र आश्रम में पहुंचता था तो रात के ‘गुप्त प्रसाद’ के लिए 8-10 लड़कियों को सिलेक्ट किया जाता। ‘गुप्त प्रसाद’ सेक्स का कोड था। महिला ने बताया, ‘जिन लड़कियों को यह ‘गुप्त प्रसाद‘ दिया जाता वे रानी कही जातीं और वीरेंद्र कृष्ण। माताओं ने बताया कि कृष्ण की 16,108 रानियों हो सकती हैं।’ महिला ने बताया कि आश्रम में एक रजिस्टर था जो महिलाओं के मासिक धर्म चक्र का रिकॉर्ड रखता था।

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75 साल के वीरेंद्र देव के शिकार हुए लोगों में ज्यादातर ब्रह्म कुमारी के अनुयायी रहे हैं। शुरुआत के दिनों में वीरेंद्र के ब्रह्म कुमारीज के संबंध थे, जो कुछ समय बाद खत्म हो गए थे। बाद में वीरेंद्र ने ‘माताओं’ और ‘भाइयों’ का एक नेटवर्क तैयार किया जो यूपी और राजस्थान के कई इलाकों में सत्संग और गीता पाठ का आयोजन करते थे। इन आयोजनों में निम्न मध्यमवर्ग के लोग शरीक होते थे। वीरेंद्र के ये एजेंट अनुयायियों को पहले यह समझाते थे कि कि ब्रह्म कुमारी के संस्थापक लेखराज कृपलानी की आत्मा वीरेंद्र देव में वास करती है। इसके बाद भक्तों को 7 दिन के ध्यान कैंप में भेजा जाता था, जहां वीरेंद्र देव उपदेश देता था। वीरेंद्र देव के पूर्व अनुयायी व एएसआई के गर्ग ने कहा, ‘हमें लगता था कि वह भगवान हैं।’ एक अन्य अनुयायी विनीता ने बताया कि अनुयायियों को उनके नियमों का पालन करना पड़ता था, मसलन- साथी से सेक्स न करें, सादा भोजन करें, समाजिक आयोजनों व लगों से दूर रहें। वीरेंद्र ने जब एएसआई गर्ग की 16 साल की बेटी को आश्रम में बुालाया तो उसे भेजा गया। गर्ग ने बताया, ‘हमें लगा कि बेटी को अध्यात्म की दुनिया में ले जाना ज्यादा सही होगा। उसे यूपी रे कंपिल वाले आश्रम में भेजा गया। इसके बाद हम हर हफ्ते वहां ध्यान के लिए जाया करते थे लेकिन साल 2004-2005 के बाद से अब तक बेटी को नहीं देखा। हम उससे सिर्फ फोन पर बात कर पाते।’

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वीरेंद्र देव बेहद आसानी से अपने जाल में फंसा लेता। अपने अनुयायियों से वह कहता कि वह ईश्वर है और 2020 में दुनिया खत्म हो जाएगी। वह लोगों से कहता कि अगर वे जिंदा रहना चाहते हैं तो उन्हें डोनेशन के रूप में कुछ ‘कुर्बान’ करना पड़ेगा। बांदा की रहने वाली एक महिला का आरोप है कि उनका रेप किया गया, आश्रम में वह एक सेवादार के रूप में रहती थीं। उन्होंने बताया कि आश्रम के लिए उन्होंने 10 बिघा जमीन बेची और 10 लाख रुपये दिए। इतना ही नहीं, उन्होंने साल 2007 में अपनी बेटी को भी आश्रम के लिए समर्पित कर दिया। साल 2015 में वह अपनी बेटी के साथ किसी तरह आश्रम से भाग निकलने में कामयाब हुईं। दोनों यह कहते हुए बाहर निकलीं कि बाबा के लिए और अनुयायी लाएंगे। वह कहती हैं, ‘हम ढंढ रहे थे भगवान और वह तो शैतान निकला।’

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