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महिलाओं में बनने वाला सेक्स हार्मोन जिम्मेदार है अस्थमा के लिए!

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महिलाओं में बनने वाला सेक्स हार्मोन जिम्मेदार है अस्थमा के लिए! एक नए शोध में पता चला है कि महिलाओं में बनने वाला सेक्स हार्मोन एलर्जी और अस्थमा जैसी शिकायत पैदा कर सकता है। वैज्ञानिकों ने पांच लाख से ज्यादा महिलाओं पर रिसर्च कर यह तथ्य पेश किया है। रिसर्च में अस्थमा के लक्षणों और महिलाओं में होने वाले दो अहम बदलावों को शामिल किया गया है। ये दो अहम बदलाव हैं- किशोरावस्था को प्राप्त करना और माहवारी का बंद होना।

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रिसर्च से जुड़ी यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग की निकोला मैकक्लियरी के मुताबिक, ‘अस्थमा और एलर्जी के लक्षण अक्सर शुरुआती युवावस्था और माहवारी रुकने से प्रभावित होते हैं। हालांकि इसके पीछे के कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हैं।’ ‘जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्युनोलॉजी’ में यह रिसर्च प्रकाशित हुआ है। रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने अस्थमा से पीड़ित महिलाओं की किशोरावस्था से लेकर 75 साल की उम्र तक के 50 से ज्यादा शोधों पर गौर किया है।

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महिलाओं के अवसाद और फिक्र या चिंता संबंधित बीमारियों से ग्रसित होने की संभावना अधिक है क्योंकि सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन पुरुषों की तुलना में महिलाओं के सिर में रक्त का अधिक प्रवाह करता है। एक महत्वपूर्ण शोध में ऐसा संकेत दिया गया है कि संभवत: यौवन के दौरान लिंग अंतर उत्पन्न हो सकता है।पेन्सिलवेनिया युनिवर्सिटी के प्रोफेसर थेओडोर सैटर्थवेट ने बताया कि ये नतीजे संभवत: किशोरावस्था शुरू होने के साथ होने वाले तंत्रिका संबंधी महत्वपूर्ण विकार और मूड विकार, व्यग्रता या उत्कंठा विकार और एक तरह की पागलपन सरीखी लिंग विषमताओं के प्रभाव हो सकते हैं।

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सैटर्थवेट ने समझाया कि आमतौर पर महिलाओं में चिंता या फिक्र की व्यापकता या फैलाव का स्तर अधिक होता है और पुरुषों में मानसिक विकारों का फैलाव ज्यादा होता है।शोधकर्ताओं ने शोध के लिए आठ से लेकर 22 वर्ष के बीच की 922 युवतियों के मस्तिष्क रक्त प्रवाह के विकास का विश्लेषण करने के लिए चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन का प्रयोग किया। शोध में पाया गया कि लड़की के मस्तिष्क के जिन हिस्सों में रक्त प्रवाह सबसे अधिक देखा गया, वे हिस्से वे हैं जो मनोभावों से निबटते हैं और सामाजिक स्थितियों पर नियंत्रण करते हैं। यह शोध `प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज` पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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