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चॉकलेट खिलाईये अपनी पार्टनर को, फिर वो आपको नहीं रोक पाएगी! रिसर्च

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चॉकलेट खिलाईये अपनी पार्टनर को, फिर वो आपको नहीं रोक पाएगी! रिसर्च , वैज्ञानिकों ने किस हार्मोन की खोज की है। इस हार्मोन की खोज के बाद डॉक्टर्स को स्त्रियों में संभोग के प्रति अनिच्छा का इलाज करने में मदद मिलेगी। दुनियाभर की 40 प्रतिशत महिलाएं जीवन में कभी ना कभी संभोग के प्रति अनिच्छुक महसूस करती हैं। अभी तक इसे किशोर से वयस्क बनने में मदद करने वाले हार्मोन के तौर पर जाना जाता था। इसे किसपेप्टिन या किस हार्मोन कहा जाता है। शोध के मुताबिक जिन महिलाओं का मन संभोग से उचट गया है उनके इलाज में ये हार्मोन मददगार होगा।

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अभी तक महिलाओं में संभोग की अनिच्छा के लिए टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ाया जाता था। लेकिन उसके कुछ साइड इफेक्ट भी थे। किसपेप्टिन ना केवल संबंध के प्रति आकर्षण पैदा करता है बल्कि पार्टनर के साथ संबंधों को सुधारने में भी मदद करता है।शोध करने वाली जूली बेकर बेल्जियम की लीग युनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उनके मुताबिक, संभोग के लिए स्त्रियों में इच्छा फिर से जगाने का कोई बढ़िया उपाय फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

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इसके अलावा आपको बता दें कि किसपेप्टिन मिलता किस चीज़ में है तो जानकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल चॉकलेट में किसपेपटिन नाम का एक तत्व पाया जाता है जो प्यूबर्टी लाता है और आपको लव मेकिंग के लिए उकसाता है। यानि आप कह सकते हैं कि महिलाओं के लिए चॉकलेट मेंटल वियाग्रा का काम करेगा और आपके पार्टनर का मूड को रोमांटिक बनाएगा।

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इसके अलावा ये तकनीक साइकोसेक्शुअल डिसऑर्डर के ट्रीटमेंट में काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है। इस रिसर्च के ट्रायल को 29 स्वस्थ व्यक्तियों पर किया गया। इसमें से कुछ लोगों को किसपेप्टिन का इंजेक्शन दिया गया। दोनों तरह के लोगों ने सेक्शुअल और नॉन सेक्शुअल रोमान्टिक तस्वीरों पर अलग-अलग तरीके से रिएक्ट किया।

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लंदन के इंपीरियल कॉलेज की टीम ने ऐसी पांच महिलाओं का अध्ययन किया है जिन्हें हाइपोथैलमिक एमनेरिया (एचए) की दिक्क़त थी। यह समस्या एथलीटों में आमतौर पर पाई जाती है। इसमें महिला का मासिक स्त्राव बंद हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दिमाग़ को उत्तेजित करने से किसपेप्टिन हार्मोन का उत्सर्जन बढ़ जाता है और इस हार्मोन की मात्रा बढ़ने से प्रजनन क्षमता बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस शोध का दायरा छोटा है लेकिन इससे एक महत्वपूर्ण अवधारणा की पुष्टि होती है।

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वैज्ञानिकों ने इस बात पर ग़ौर किया कि एचए से पीड़ित महिलाओं में किसपेप्टिन और अन्य प्रजनन संबंधी हार्मोन में कम हो जाते हैं। इसकी वजह से उनके मासिक चक्र में दिक्कत आती है और उनमें बांझपन की समस्या पैदा हो जाती है।

 

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