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हनी ट्रैप में फंसा कर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी उगलवाना चाहती है राज़!

हनी ट्रैप

हनी ट्रैप में फंसा कर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी उगलवाना चाहती है राज़! , पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने भारत के तीन अधिकारियों को हनीट्रैप में फंसाकर सीक्रेट जानकारियां निकलवाने की नाकाम कोशिश की। पाक में मौजूद भारतीय उच्च आयोग के तीनों अधिकारियों को फंसाने की कोशिश हुई थी, लेकिन वक्त रहते उनको सब समझ आ गया था। उन्होंने खुद ही इस बात की जानकारी अपने सीनियर्स को दी थी।

जिन तीन को पाकिस्तान हनीट्रैप के जाल में फंसाना चाहता था वे हाई कमीशन में सरकारी कागजातों का अनुवाद करने का काम किया करते हैं। बता दें कि 2010 में भी ऐसा ही कुछ हुआ था। तब हाई कमीशन की प्रेस डिवीजन में काम करने वाली माधुरी गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था, उन्होंने कथित तौर पर आईएसआई के एक अधिकारी को सीक्रेट डॉक्यूमेंट सौंप दिए थे।

तीनों अधिकारियों को फौरन वापस भारत बुला लिया गया था, अब तीनों से पूछताछ की जा रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, सीनियर्स को अबतक यही लग रहा है कि तीनों सब सच बोल रहे हैं और पाकिस्तान उनसे किसी तरह की कोई जानकारी निकलवाने में कामयाब नहीं हुआ है।

इसके अलावा आईएसआई एनडीए में सिलेक्ट होने वाले कैडेट्स को हनी ट्रैप या पैसे के जरिए अपना एजेंट बनाना चाहती है। ताकि जब ये कैडेट अफसर बनकर सेना में सेवाएं दें तो उनके लिए काम करें।

इंडिया टुडे के मुताबिक पाकिस्तान की बांग्लादेश स्थित यूनिट के कर्नल अख्तर हामिद को ये चार्ज दिया गया है। इस साल अगस्त में भारतीय खूफिया एजेंसियों ने इस बारे में एक रिपोर्ट भी जारी की थी। इसके मुताबिक पहले एक उर्दू बोलने वाली पाकिस्तानी औरत, अंग्रेजी बोलने वाली चाइनीज औरत सोशल मीडिया के जरिए इन कैडेट्स और अफसरों से संपर्क करती हैं। इसके बाद एक दो मुलाकातें होती हैं। फिर और करीब आया जाता है। अंत में टार्गेट का वीडियो बना लिया जाता है और उससे ब्लैकमेल कर  खुफिया जानकारियां निकलवाई जाती हैं।

हनी ट्रैप क्या होता है?

दुनिया के तमाम देश अपने दुश्मन का राज जानने के लिए नए-नए हथकंडे आजमाते रहते हैं। क्योंकि लड़ाई सिर्फ सरहद पर ही नहीं होती, दुश्मन के घर में सेंध लगाकर अहम जानकारी जुटा लेना भी लड़ाई का अहम हिस्सा होता है। एक बार दुश्मन देश से जुड़ा कोई अहम दस्तावेज या खुफिया जानकारी हाथ लग जाए तो उसके खिलाफ रणनीति बनाना बेहद आसान हो जाता है। और ये काम एक महिला जासूस से बेहतर कौन कर सकता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी इन दिनों भारत के खिलाफ इसी हथियार का इस्तेमाल कर रहा है। जिसे कहा जाता है- हनी ट्रैप।

कहते हैं इंसान की सबसे बड़ी सच्चाई उसकी पहचान होती है, लेकिन हनी ट्रैप की असली पहचान कभी जाहिर ही नहीं होती। हनी ट्रैप के मिशन पर निकली महिला दोस्ती की आड़ में न सिर्फ जानकारियां हासिल करती है बल्कि कई बार अहम दस्तावेज भी उनके हाथ लग जाते हैं। कई मामलों में महिला सिर्फ लच्छेदार बातों का ही सहारा नहीं लेती बल्कि अपने शिकार को ब्लैकमेल भी करती है। अगर शिकार की कोई आपत्तिजनक तस्वीर या खास बातचीत की कोई डिटेल हाथ लग जाए तो उसे जगजाहिर करने की धमकी भी दी जाती है। बदनाम होने के डर से वो शख्स अहम से अहम राज भी उगल देता है।

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