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शादी का वादा करके सहमति से सेक्स करना रेप के दायरे में नहीं! मप्र सरकार की तैयारी

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शादी का वादा करके सहमति से सेक्स करना रेप के दायरे में नहीं! मप्र सरकार की तैयारी , अब यदि कोई पुरुष किसी महिला को शादी का वादा करके संबंध बनाता है तो उसे RAPE नहीं माना जाएगा। इतना ही नहीं, यदि कोई युवती किसी युवक के साथ LIVE IN RELATION में है तो वो पुरुष के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज नहीं करा सकेगी। अब तक ऐसे मामलों में पुलिस IPC की धारा 376 के तहत FIR दर्ज करती थी परंतु SHIVRAJ SINGH CHOUHAN सरकार मप्र क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट-2017 (CRIMINAL LAW (MADHYA PRADESH AMENDMENT) BILL, 2017) में ऐसे अपराधों के लिए नई धारा के तहत दर्ज करने की तैयारी कर रही है। ऐसे मामले अब आईपीसी की धारा 493 ‘क’ के तहत दर्ज किए जाएंगे। यह जमानती अपराध होगा और इसकी सजा 3 साल होगी। बता दें कि क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश को सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाओं वाले राज्य की श्रेणी में रखा गया था। सरकार ने बलात्कार के मामले कम दर्ज हों, इसलिए यह प्रावधान किया है। मध्यप्रदेश में शादी का झांसा देकर रेप करने की वारदातें भी अधिक होती हैं।

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लिव इन के मामलों में भी धारा 376 के तहत केस दर्ज होने के कारण पुलिस के आंकड़े काफी बढ़ जाते थे। यही वजह है कि कई वर्षों से महिलाओं के खिलाफ ज्यादती के मामले में मप्र पहले स्थान पर रहता था। अब ऐसे मामलों में धारा 493 ‘क’ के तहत केस दर्ज होगा। इससे न केवल पुलिस के आंकड़े भी सुधर जाएंगे। बल्कि लिव इन में रह रही महिला के पार्टनर की सामाजिक छवि भी ज्यादा खराब नहीं होगी। अदालत से बरी होने के बाद भी उसे बलात्कारी की ही संज्ञा दी जाती रही है। मध्यप्रदेश क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट-2017 के तहत आईपीसी की 6 और सीआरपीसी की 5 धाराओं पर काम किया गया। डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला, एडीजी अरुणा मोहन राव और जिला अभियोजन अधिकारी (सीआईडी) शैलेंद्र सिरोठिया व अन्य अफसरों ने अप्रैल 2017 में इस पर काम शुरू किया था। अक्टूबर 2017 में प्रस्तावित संशोधन विधि विभाग को सौंप दिया गया। विधि विभाग द्वारा हुए आखिरी संशोधन के बाद इसे विधानसभा में पारित कर दिया गया। फिलहाल मप्र क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट-2017 को राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है।

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किसी महिला के कपड़े फाड़ने या उस पर आपराधिक बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 ‘ख’ के तहत केस दर्ज किया जाएगा। दोष सिद्ध होने पर न्यूनतम तीन साल और अधिकतम सात साल की सजा होगी। दूसरी बार भी ऐसे ही अपराध में 7 से 10 वर्ष तक की सजा और एक लाख का जुर्माना भी होगा। महिला का पीछा करने वालों के खिलाफ 354 ‘घ’ का केस दर्ज होगा। दूसरी बार दोष सिद्ध होने पर तीन से सात साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके लिए मजिस्ट्रेट के अधिकार बढ़ाए गए हैं। अब तक उन्हें ऐसे मामलों में दस हजार रुपए तक जुर्माने के अधिकार थे।

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