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चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने के लिए सरकार ने की पहल, बनाए अंग्रेज़ी की वर्ड्स

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने के लिए सरकार ने की पहल, बनाए अंग्रेज़ी की वर्ड्स, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफी और रेप विडियो देखने वालों पर लगाम लगाने के लिए सरकारी पहल की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी। कोर्ट में सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, मंत्रालय ने ऐसे कॉमन अंग्रेजी कीवर्ड्स की लिस्ट बनाई है जो आम तौर पर चाइल्ड पॉर्नोग्राफी और रेप विडियो देखने के लिए सर्च किए जाते हैं। कीवर्ड्स की यह लिस्ट गूगल, याहू, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों की दी गई हैं ताकि जरूरी कदम उठाए जा सकें।

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कोर्ट ने यह निर्देश हैदराबाद के एक एनजीओ प्रजावाला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। 3 साल की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुओ-मोटो लेते हुए इस याचिका पर यह निर्देश दिया। एनजीओ ने अपनी याचिका में दावा किया था कि ऐसे रेप और पॉर्नोग्राफी विडियो समाज की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से ये विडियो बड़ा खतरा बन सकते हैं।

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अडिशनल सलिसिटर ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा, ‘पोर्टल जब पूरी तरह से प्रयोग में आ जाएगा तो लोग अपनी शिकायत वहां दर्ज कर सकते हैं। साथ ही शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और केस का क्या स्टेट्स है इसकी जानकारी भी ले सकते हैं।’ सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद 15 फरवरी की तारीख अगली सुनवाई के लिए तय की। सीबीआई और केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से पक्ष रखते हुए अडिशनल सलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने जस्टिस मदन बी लोकुर और उदय उमेश ललित को यह जानकारी दी। सिंह ने कहा, ‘दूसरी भाषाओं में भी ऐसे कॉमन कीवर्ड्स की लिस्ट बनाई जा रही है और आनेवाले वक्त में वह लिस्ट भी सभी कंपनियों की दी जाएगी।’

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सिंह ने कहा, सरकार ने ऑनलाइन साइबर क्राइम रोकने के लिए www.cyberpolice.gov.in बनाई है। यह पोर्टल फिलहाल सुरक्षा ऑडिट की प्रक्रिया में है और टेस्ट और ट्रायल के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इसका ऑपरेशन शुरू हो सकेगा। पिछले महीने जजों की बेंच ने गृह मंत्रालय को 10 जनवरी से पहले सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफी और रेप विडियो से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने का निर्देश दिया था।

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