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आदिवासी महिलाएं नहीं हैं महफूज, हर महीने 13 महिलाओं का होता है रेप!

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आदिवासी महिलाएं नहीं हैं महफूज, हर महीने 13 महिलाओं का होता है रेप! छत्तीसगढ़ सरकार के लाख जतन के बावजूद राज्य की आदिवासी महिलाएं महफूज नहीं हैं। गवाह है, नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो। यहां हर महीने करीब 13 महिलाओं की आबरू लूटी जा रही है। 2016 में राज्य में आदिवासी महिलाओं के साथ दुष्कर्म के 157 मामले दर्ज हुए। यह मध्य प्रदेश में दर्ज 377 एफआईआर के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।एनसीआरबी की यह रिपोर्ट बीते वर्ष 30 नवंबर को जारी की गई है।

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करीब 37 फीसद एसटी आबादी वाले छत्तीसगढ़ में एसटी के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले में देश में छठवें नंबर पर है। 2016 में यहां कुल 402 मामले दर्ज किए गए, जो 2015 के 373 की तुलना में भी अधिक है। राज्य में एसटी महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले भी बढ़े हैं। 2016 में इसके 17 प्रकरण दर्ज हुए। इसी तरह दुष्कर्म की कोशिश का भी एक मामला थाने तक पहुंचा।

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एसटी महिलाओं पर यौन हिंसा के मामले भी राज्य में बढ़े हैं। इन्हें निर्वस्त्र करने की देश में कुल 50 घटनाएं हुई हैं। इनमें अकेले 15 एमपी तथा 9 छत्तीसगढ़ में हुई हैं। वहीं, आंध्रा और महाराष्ट्रा में 5-5 और राजस्थान में तीन एफआईआर दर्ज हुए। इस सरकारी रिपोर्ट में तो केवल वहीं मामले होंगे जो थाने तक पहुंच गए हैं। इससे कहीं ज्यादा मामले सरकारी तंत्र में दब कर रह जाते हैं। बस्तर में आदिवासी महिलाओं से किस तरह दुर्व्यवहार हो रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है।

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वहीं राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि आयोग के संज्ञान में जो भी मामले आते हैं, उस पर त्वरित कार्रवाई भी की जाती है। दुष्कर्म का कोई प्रकरण आयोग में नहीं आया है। छेड़छाड़ की कुछ शिकायतें आई थीं, उस पर कार्रवाई की गई है, आरोपियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है। राज्य में आदिवासी हितों की रक्षा और उनकी सुरक्षा की पूरी कोशिश की जा रही है।

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