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सेना में समलैंगिकों पर ट्रंप की टेढ़ी नज़र, भर्ती को लेकर हुआ बवाल

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सेना में समलैंगिकों पर ट्रंप की टेढ़ी नज़र, भर्ती को लेकर हुआ बवाल , अमेरिका में सेना में समलैंगिकों की भर्ती का मामला उलझता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की इस मामले पर नज़र तिरछी है। दरअसल सारा बवाल ट्रंप के ट्वीट से शुरु हुआ था जिसमें सेना में समलैंगिकों की भर्ती पर रोक की बात की गई थी। इस मामले पर बवाल होने के बाद संघीय अदालत ने ट्रंप के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

अगर मामला विस्तार से देखें तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने संघीय अदालत से अनुरोध किया है कि वह पेंटागन के जरिए समलैंगिकों की भर्ती शुरू करने पर अगले वर्ष से रोक लगा दे। बीते जुलाई में ट्रंप ने तीन ट्वीट कर कहा था कि सेना में समलैंगिक व्यक्ति किसी भी पद पर सेवा नहीं दे सकेंगे। उसके बाद से इस दिशा में कई कानूनी कदम उठाए गए हैं। न्याय विभाग की ओर से बुधवार को भी इस बाबत एक कदम उठाया गया।

उन ट्वीटों के बाद व्हाइट हाउस की ओर से औपचारिक ज्ञापन दिया गया जिसके चलते विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। सेना के कई सदस्यों और अधिकार समूहों ने इसे कानूनी चुनौती दी। उसके बाद दो संघीय अदालतों ने ट्रंप के प्रतिबंध पर अस्थायी रोक लगा दी। अब पेंटागन को एक जनवरी से समलैंगिक आवेदनकर्ताओं की भर्ती शुरू करनी है।

सरकार अदालत के माध्यम से इसे आंशिक तौर पर टालना चाहती है ताकि पेंटागन तय तारीख से समलैंगिक भर्तियां शुरू ना करे। ओबामा प्रशासन ने पिछले वर्ष एक नई नीति की घोषणा की थी जिसके तहत पेंटागन को समलैंगिक आवेदनकर्ताओं को एक जुलाई 2017 से स्वीकार करना शुरू करना था। हालांकि इसमें भी छह माह की देरी हो गई क्योंकि रक्षा मंत्री जिम मैटिस को इस मामले का अवलोकन करना था। जाहिर है कि संघीय अदालत का फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती की तरह है लेकिन डोनाल्ड ट्रंप भी अपने फैसले पर अडिग हैं। देखना होगा कि सेना में समलैंगिकों की भर्ती का अंत क्या होता है।

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